कोरोना मजबूरी : 20 के बजाय 150 रुपये लग रहे हैं मावली अप-डाउन के!

thumbnail


उदयपुर। एक ओर सरकार ने प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह राज्य पहुंचाने के लिए करोड़ों खर्च किए और श्रेय लेने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन सरकार की नजर अब उन दिहाड़ी, नौकरीपेशा लोगों पर नहीं है जिन्हें एक जगह से दूसरी जगह पर रोजाना अप-डाउन करना पड़ता है। चाहे सडक़ मार्ग हो या रेल मार्ग, दोनों की मार इन निम्न और मध्यमवर्गीय कामगारों पर पड़ रही है।

उदयपुर से मावली-फतहनगर-कपासन-चित्तौडग़ढ़ तक के सफर का ही उदाहरण लें तो कोरोना से पहले जितने लोग कामकाज के लिए अप-डाउन करते थे, वे रेलगाड़ी को सबसे सस्ता और सहज साधन मानते थे। अभी इस मार्ग पर सिर्फ एक रेलगाड़ी मेवाड़ एक्सप्रेस चल रही है और यह विशेष नंबर से चल रही है। 

कोरोनाकाल में यह विशेष गाड़ी होने के कारण यह स्पेशल नंबर से संचालित की जा रही है। ऐसे में जो लोग मासिक पास की सुविधा लेकर सामान्य किराये में अप-डाउन कर लेते थे उन्हें अब रोज के 100 से 150 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। पहले तो लोकल रेलगाड़ी में सिर्फ 10 रुपये में आदमी उदयपुर से मावली पहुंच जाता था, लेकिन अब उसे 75 रुपये देने पड़ते हैं और एडवांस में रिजर्वेशन कराने की मजबूरी भी है क्योंकि कोरोना से बचाव की एडवाइजरी के तहत रेलगाड़ी में भी निर्धारित दूरी पर ही यात्रियों को बिठाया जा रहा है। विडम्बना यह है कि मासिक पास की सुविधा भी बंद है। अब 20 रुपये के बदले 150 रुपये मावली के लिए प्रतिदिन देना कितना महंगा पड़ता है, यह समझना मुश्किल नहीं है।

यही हाल सडक़ मार्ग का है। रोडवेज बस में भले ही किराया निर्धारित है, लेकिन अभी रोडवेज बसों के भी फेरे कम ही हैं। ऐसे में निजी मिनी बसों का सहारा लेना मजबूरी है। निजी बस से फतहनगर से मावली आने के ही 20 रुपये हैं और मावली से डबोक के बीच का भाड़ा 30 से 40 रुपये वसूला जा रहा है। डबोक से उदयपुर तक का किराया भी 30 से 40 रुपये वसूला जा रहा है। मावली से कोई सीधे उदयपुर आए तब भी उसे 60 से 70 रुपये देने हैं जो कि कोरोना से पहले 30 से 40 रुपये हुआ करते थे। 

प्रतिदिन अपडाउन करने वाले मनीष दाधिच और अंशुल माहेश्वरी कहते हैं सरकार ने प्रवासियों को लाने के लिए निशुल्क सेवा दी, रोडवेज बसों को भी प्रवासियों को इधर- उधर पहुंचाने के लिए निशुल्क लगाया गया, अब इसकी भरपाई सरकार हम जैसे लोगों से करना चाहती है। कम से कम एक लोकल ट्रेन तो सुबह और शाम के वक्त चलाई जानी चाहिए जिससे कामगार अप-डाउन अपनी जेब के अनुरूप खर्च करके कर सकें। 

यह खबर भी पढ़े: रात को सोने से पहले आधा चम्मच दूध में डालकर पी लें ये चीज, शरीर की सभी कमी हो जाएगी दूर

यह खबर भी पढ़े: चीन के 59 एप पर लगा बैन,लेकिन अब तक प्ले स्टोर/ऐप स्टोर पर क्यों दिख रहे हैं ये ऐप्स? लोगो को नहीं मिल रहा है जवाब

source

Back To Top

You have successfully subscribed to the newsletter

There was an error while trying to send your request. Please try again.

दैनिक समाचार will use the information you provide on this form to be in touch with you and to provide updates and marketing.