नई शिक्षा नीति को लेकर कांग्रेस ने PM मोदी पर बोला हमला, कहा- परिभाषित लक्ष्य और स्पष्ट सोच की कमी

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा लाई गई नई शिक्षा नीति को लेकर कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला बोला है। कांग्रेस का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) का उद्देश्य ‘स्कूल एवं उच्च शिक्षा’ में परिवर्तनकारी सुधार लाना होना चाहिए लेकिन इसमें सिर्फ शब्दों की कारीगरी, बाह्य आडम्बर और चमक-दमक पर जोर दिया गया है। इस नीति में तर्कसंगत कार्ययोजना, स्पष्ट परिभाषित लक्ष्य और क्रियान्वयन के सोच व दृष्टि की कमी है।

कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला, पल्लम राजू और राजीव गौड़ा ने रविवार को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिये पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में मानवीय विकास, ज्ञान प्राप्ति, क्रिटिकल थिंकिंग एवं जिज्ञासा की भावना का स्थान नहीं है। उस पर बिना परामर्श, चर्चा और विचार विमर्श के ही इस लागू किया गया। इसकी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है।

कांग्रेस नेताओ ने केंद्र को मोदी सरकार को घेरते हुए कहा कि आज और कल की पीढ़ियों के भविष्य निर्धारण करने वाली इस नीति को पारित करने से पहले संसदीय चर्चा की जरूरत नहीं समझी गयी। जबकि कांग्रेस जब शिक्षा का अधिकार कानून लायी तो संसद के अंदर और बाहर इस ओर चर्चा हुई थी।

सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस सरकार में सिफारिश की गई थी कि जीडीपी का 6 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च किया जाएगा। फिर मोदी सरकार में 2014-15 के 4.14 प्रतिशत से गिरकर 2020-21 में शिक्षा पर किया जाने वाला खर्च 3.2 प्रतिशत पर पहुंच गया। ऐसे में शिक्षा नीति में वादे और हक़ीक़त में क्रियान्वयन में काफी अंतर है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नई शिक्षा नीति का मुख्य केंद्र ‘ऑनलाइन शिक्षा’ है। इसके आधार पर पढ़ने वाले विद्यार्थियों की औसत भर्ती अनुपात मौजूदा 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करने का दावा किया गया है। हाशिए पर रहने वाले वर्गों के 70 प्रतिशत से अधिक बच्चे पूरी तरह ऑनलाईन शिक्षा के दायरे से बाहर हो जाएंगे, जैसा कोविड-19 की अवधि में ऑनलाइन क्लासेस की एक्सेस में गरीब के बच्चे पूर्णतया वंचित दिखे। यहां तक कि UDISE+(’यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन ऑन स्कूल एजुकेशन’, स्कूल शिक्षा विभाग, भारत सरकार) डेटा के अनुसार केवल 9.85 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में ही कंप्यूटर हैं तथा इंटरनेट कनेक्शन केवल 4.09 प्रतिशत स्कूलों में है। ऐसे में देश में गरीब, मध्यम वर्गीय और अमीर के बच्चों के बीच नया डिजिटल डिवाइड पैदा हो जाएगा।

सुरजेवाला ने केंद्र के फैसलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह नई शिक्षा नीति-2020 शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देने वाली है। इससे सरकारी अनुदान राशि में भारी कमी आएगी, फंड में कटौती होगी, फीस कई गुना बढ़ेंगी तथा शिक्षा और महंगी हो जाएगी। सरकारी संस्थानों के बंद होने एवं अनियंत्रित निजीकरण पर अधिक निर्भरता के कारण उच्च शिक्षा मध्यम वर्ग और गरीबों की पहुंच से बाहर हो जाएगी।

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