सीएम शिवराज ने राममंदिर निर्माण के लिए अन्न त्यागने वाली मां उर्मिला को किया नमन

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भोपाल। जबलपुर निवासी 81 वर्षीय उर्मिला चतुर्वेदी ने अयोध्या में 28 साल पहले विवादित ढांचा गिरने पर संकल्प लिया था कि जब तक राम मंदिर का निर्माण शुरू नहीं होगा, तब तक वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगी। उन्होंने राम मंदिर के लिए 28 साल तक उपवास किया और इस दौरान उन्होंने अन्य का एक दाना तक नहीं खाया। अब पांच अगस्त को अयोध्या की आधारशिला रखी जाएगी। इसके साथ ही उनका संकल्प भी पूरा हो जाएगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राममंदिर निर्माण के लिए अन्न त्यागने वाली मां उर्मिला चतुर्वेदी की सराहना करते हुए उन्हें नमन किया है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को ट्वीट के माध्यम से एक दोहा पोस्ट किया है-‘श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन हरण भवभय दारुणं। नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं।’ सीएम ने इसका अर्थ बताते हुए ट्वीट में लिखा है कि -‘प्रभु श्रीराम कभी भक्तों को निराश नहीं करते हैं, फिर चाहे वह त्रेतायुग की शबरी माता हों या आज की मैया उर्मिला! माता, धन्य है आपकी श्रद्धा! यह सम्पूर्ण भारतवर्ष आपको नमन करता है! जय सियाराम!’

बता दें कि अयोध्या में विवादित ढांचा 6 दिसम्बर 1992 को गिराया गया था। इसके बाद देशभर में दंगे हुए थे। उस दौरान जबलपुर के विजय नगर निवासी उर्मिला चतुर्वेदी ने संकल्प लिया था कि राम मंदिर की नींव रखे जाने तक वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगी, तब वे 53 साल की थीं। वे बीते 28 साल से राम नाम का जाप करते हुए उपवास पर हैं। इस दौरान वे केवल फलाहार करती हैं। पहले लोगों ने उन्हें उपवास तोडऩे के लिए सलाह दी, लेकिन वे अपने संकल्प पर अडिग रहीं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया तो वे बेहद खुश हुईं। उन्होंने फैसला सुनाने वाले जजों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर बधाई भी दी थी।

अब उर्मिला 81 साल की हो गई हैं। उन्होंने बताया कि वे प्रधानमंत्री आगामी पांच अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखेंगे, उस दिन वह दिनभर घर में राम नाम का जाप करेंगी। वे चाहती हैं कि अयोध्या जाकर रामलता के दर्शन करने के बाद ही अन्न ग्रहण करें, लेकिन उन्हें कार्यक्रम का आमंत्रण नहीं मिला है। इससे वे दुखी हैं, लेकिन इसे भगवान की इच्छा मानकर उन्होंने संतोष जताया है। उनका कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर का बनना उनके लिए पुनर्जन्म जैसा है। उनका राम मंदिर निर्माण का संकल्प तो पूरा होने जा रहा है, लेकिन अब उनकी इच्छा है कि अयोध्या में उन्हें थोड़ी सी जगह मिल जाए, ताकि वे अपना शेष जीवन वहां बिता सकें।

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