उत्तराखंड में महिला टिचर्स तबादलों के लिए तलाक ले रही हैं। जी हां, हमारे राज्य में ट्रांसफर के लिए महिला टिचर्स अपना शादी तक तोड़ दे रही हैं। उत्तराखंड के शिक्षा विभाग से एक ऐसी हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। जिसने हर किसी के होश उड़ा दिए हैं।
सुगम इलाकों में ट्रांसफर के लिए महिला टीचर्स का जुगाड़
दरअसल पहाड़ों के दुर्गम इलाकों के स्कूलों से निकलकर मैदानी और सुगम इलाकों में ट्रांसफर पाने के लिए उत्तराखंड में महिला शिक्षिकाओं ने एक अनोखा रास्ता चुना है। ऐसा रास्ता जिसे सुनकर बड़े-बड़े अधिकारियों के भी होश उड गए।
उत्तराखंड शिक्षा विभाग में 1500 से ज्यादा शिक्षकों के तबादले
हाल ही में शिक्षा विभाग में 1500 से ज्यादा शिक्षकों के तबादले हुए। जब तबादलों की सूची बहार आई तो हर कोई हैरान रह गया। उत्तराखंड में शिक्षकों और कर्मचारियों के तबादलों के लिए एक बाकायदा सख्त ट्रांसफर एक्ट बना हुआ है।
जिसमें कुछ खास श्रेणी के लोगों को ही मनचाही जगह ट्रांसफर दिया जाता है। जैसे वो लोग जिनके माता-पिता गंभीर बीमार हैं, जिसे सास ससुर की देखभाल करनी है, विधवा या विधुर होना और तलाकशुदा होना।
मनचाहे ट्रांसफर के लिए पति को दे रही तलाक
लिहाजा, इसी तलाकशुदा होने के नियम को कुछ महिला शिक्षिकाओं ने अपना हथियार बना लिया। मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि कुछ शिक्षिकाओं ने सुगम मनचाहे इलाकों में ट्रांसफर पाने के लिए अपने पति को तलाक दे दिया। लेकिन हद तो तब हो गई, जब शहर में ट्रांसफर पाने के बाद ये तथाकथित तलाकशुदा शिक्षिकाओं को उनके पति स्कूल छोड़ने आने लगे। जिनसे उन्होंने कागजी तौर पर तलाक ले लिया था।
ट्रांसफर के बाद फिर कर रही कोर्ट मैरिज
ट्रांसफर मिलने के बाद इन टिचर्स ने फिर से कोर्ट मैरिज कर ली। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो लंबे वक्त से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में नौकरी करने के बाद भी शिक्षिकाओं को सुगम इलाकों में तैनाती नहीं मिली। ऐसे में उन्होंने अपने पति से कागजी तलाक का रास्ता अपनाया।
कोई माता-पिता, सास-ससुर की बीमारी का बना रहा बहाना
हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स ये भी बताती हैं कि ट्रांसफर का एक और शॉर्टकट इन महिला टिचर्स ने इखतीयार किया जो था
सास-ससुर और माता-पिता की बीमारी का बहाना। बड़ी संख्या में शिक्षिकाओं ने अपने माता-पिता और सास-ससुर की बीमारी का हवाला देकर सुगम क्षेत्रों में ट्रांसफर ले लिया।
कुछ VIP शिक्षक भी
खबरों की माने तो शिक्षा विभाग में कुछ ऐसे रसूखदार और VIP शिक्षक भी हैं। जिन्होंने आज तक पहाड़ों की शक्ल तक नहीं देखी। ये वो लोग हैं जो पिछले 20 से 25 सालों से देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल जैसे शहरों में जमे हुए हैं। इनकी पूरी नौकरी सुगम इलाकों में ही गुजर गई।
अब ट्रांसफर शिक्षिकाओं को शपथ पत्र देना होगा
हालांकि सालों से पहाड़ों के दुर्गम इलाकों में तैनात महिला शिक्षिकाओं ने वहां से निकलने की छटपटाहट में एक ऐसा रास्ता अपनाया जो अब उनके गले की फांस बन गया है। शिक्षा विभाग ने माता पिता और सास ससुर की बीमारी के आधार पर तबादले लेने वाली शिक्षिकाओं के लिए आदेश जारी कर दिया है। जिसके तहत जिन शिक्षिकाओं ने इस आधार पर ट्रांसफर लिया है, उन्हें अब स्कूल के प्रधानाचार्य को एक शपथ पत्र देना होगा।
ट्रांसफर रद्द दिया जाएगा अगर…
इस शपथ पत्र में स्पष्ट करना होगा कि वो अपने बीमार माता-पिता या सास-ससुर की सेवा करेंगे। विभागीय अधिकारियों ने इसको लेकर सख्त चेतावनी भी दी है। जिसमें अगर कोई शिक्षिका ऐसा करती नहीं पाई गई या जांच में बीमारी का दावा झूठा निकला तो उसी वक्त उनका ट्रांसफर रद्द कर दिया जाएगा। साथ ही उन्हें वापस पहाड़ों पर भेज दिया जाएगा। शिक्षा महकमा राज्य का सबसे बड़ा विभाग है।
पर्वतीय इलाकों में टिचर्स नहीं देना चाहते सेवाएं
हैरत ये है कि एक पर्वतीय राज्य में टिचर्स पर्वतीय इलाकों में अपनी सेवाएं ही नहीं देना चाहते। अब इसे सिस्टम का फेलियोर कहें या फिर टिचर्स का सुगम की ड्यूटी करने की चाह। लेकिन कम से कम इसे इस राज्य के लिए तो बेहतर नहीं माना जा सकता।
