केदारनाथ में श्रद्धालुओं को गर्म पानी का इंतजार अभी बाकी

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सीएम धामी ले रहे प्रोजेक्ट की प्रगति,जुलाई में मिलेगा गर्म पानी!

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समझौता निरस्त होने पर पतंजलि ने भेजा नोटिस

भारी भरकम मशीनें, बर्नर व गीजर पहुंचे सोनप्रयाग

खच्चरों की लीद व पिरूल से बने बायोमास पैलेट्स से होगा गर्म पानी

अविकल थपलियाल

रुद्रप्रयाग। उम्मीद है कि इसी जुलाई महीने में 12 हजार फीट पर स्थित केदारनाथ धाम व पैदल रूट पर श्रद्धालुओं को 24 घण्टे गर्म पानी मिलेगा। मौसम ने साथ दिया तो दो हफ्ते के अंदर भारी भरकम मशीन केदारनाथ धाम पहुंचा दी जाएगी। फिलहाल, सोनप्रयाग में खच्चरों की लीद और पिरूल से पैलेट्स बनाने का काम चल रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में कैबिनेट ने केदारनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक अनूठी पहल की है । अब यात्रियों को ठंडे पानी के बजाय 24 घंटे पीने का गर्म पानी उपलब्ध हो सकेगा। यह व्यवस्था बायोमास पैलेट्स के माध्यम से संचालित हाॅट वाटर गीजरों से की जाएगी, जो चीड़ की पत्तियों (पिरुल) और खच्चरों की लीद से तैयार किए जायेंगे।

उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट से मंजूरी मिलने के पश्चात यह देश का पहला ऐसा प्रयोग है, जिसमें इतनी ऊंचाई वाले क्षेत्र में यात्रियों को चौबीसों घंटे गर्म पानी की सुविधा दी जायेगी।

केदारनाथ पैदल मार्ग पर खच्चरों की लीद को सुलभ इंटरनेशनल के माध्यम से एकत्रित किया जा रहा है, जबकि रुद्रप्रयाग के जंगलों से चीड़ की पत्तियों (पिरुल) को स्वयं सहायता समूह (SHG) के जरिए संग्रहित किया जा रहा है। इन दोनों के मिश्रण से फायर पैलेट्स तैयार किए जाएंगे जो केदारनाथ में लग रहे हाॅट वाटर गीजर को संचालित करेंगे।

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बायोमास स्टोव के साथ ही ये पैलेट्स केदारनाथ पैदल मार्ग पर चिन्हित ढाबों को वितरित किए जाएंगे । इससे ढाबा संचालकों को स्वच्छ और सुविधाजनक इंधन उपलब्ध होगा, जिससे उनकी इंधन आपूर्ति की समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी।

केदारनाथ धाम में अक्सर श्रद्धालुओं को गर्म पीने के पानी की कमी का सामना करना पड़ता है साथ ही स्नान के लिए गर्म पानी भी नहीं मिल पाता। इसमें श्रद्धालुओं का काफी पैसा भी खर्च होता है। इस समस्या को दूर करने के लिए सोनप्रयाग स्थित बायोमास पैलेट इकाई में तैयार पैलेट्स से संचालित ये गीजर 24 घंटे गर्म पानी उपलब्ध कराएंगे।

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केदारनाथ की टेंट कालोनी के इर्द गिर्द गर्म पानी के उपकरण स्थापित किये जाने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को पीने व नहाने के लिए निशुल्क गर्म पानी मुहैया कराया जाएगा।

गौरतलब है कि इस प्रोजेक्ट को लेकर हाईफ़ीड संस्था और पर्यटन विकास परिषद के बीच फरवरी 2026 में एक एमओयू साइन किया गया था। इस गर्म पानी के प्रोजेक्ट में जिले के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, पर्यटन अधिकारी, डीएफओ और दून स्थित हाईफ़ीड संस्था कार्य कर रही है। मंत्रिमंडल ने इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग एक करोड़ 43 लाख की धनराशि मंजूर की है।

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गर्म पानी के प्रोजेक्ट के लिए कर्नाटक,पंजाब समेत अन्य राज्यों से थर्मल उपकरण मंगाए गए हैं।
इस योजना को वर्तमान में स्थापित करने में कई मुश्किलें सामने दिख रही है। इरान युद्ध की वजह से गैस संचालित फर्नेस का बंद होना जो मशीन बनाती हैं और केदारनाथ यात्रा में जबरदस्त भीड जिसकी वजह से ट्रांसपोर्ट में काफी विलंब से हुआ। और अब सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक मशीनों को पहुंचाना भी गम्भीर चुनौती बनी हुई है। फिलहाल, गर्म पानी के लिए श्रद्धालुओं को और इंतजार करना पड़ेगा। अभी यात्रा चार महीने और चलेगी।

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पूर्व में पतंजलि को सौंपी थी जिम्मेदारी

गौरतलब है कि पूर्व में पतंजलि डेढ़ साल पूर्व इस गर्म पानी के प्रोजेक्ट पर जारी कर रही थी। सोनप्रयाग में प्रोजेक्ट से जुड़े कार्यों को शुरू भी किया था। लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर जिला पशुपालन विभाग ने पतंजलि के साथ हुए समझौते को रद्द कर दिया। इस मुद्दे पर पतंजलि की ओर से कानूनी नोटिस देने की भी बात सामने आ रही है।
पतंजलि के नोटिस की खबर के बाद सत्ता के गलियारों में हलचल मच गई थी। सोशल मीडिया में गर्म पानी प्रोजेक्ट को लेकर ‘युद्ध’ भी जारी है। स्वंय सीएम पुष्कर सिंह धामी केदारनाथ धाम में गर्म पानी प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने की लगातार ताकीद कर रहे हैं।

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प्रोजेक्ट के उद्देश्य

इस एक वर्षीय ट्रायल प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य दोहरे लाभ प्रदान करना है:

  • ढाबा संचालकों को ऊर्जा संकट के समय स्वच्छ इंधन उपलब्ध कराना
  • श्रद्धालुओं को गर्म पेयजल की सुविधा देना
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प्रोजेक्ट के तहत तय अनुबंध की तय सीमा तक फायर पैलेट्स, बायोमास ऊर्जा स्टोव चिन्हित ढाबा संचालकों और संबंधित स्थानों पर मुफ्त वितरित किए जाएंगे साथ ही हाॅट वाटर गीजर भी मुफ्त लगाये जायेंगे ।

यह पर्यावरण के अनुकूल पहल न केवल केदारनाथ क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी। खच्चर की लीद के निस्तारण व पिरुल जैसे जंगल के संसाधनों के उपयोग से जंगलों में आग लगने की घटनाओं पर भी नियंत्रण की उम्मीद है।

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यह प्लांट के खच्चर की लीद को सुखाने का नही अपितु पूर्ण बायोमास पैलेट्स तैयार करने का संयंत्र है ।

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