उपभोक्ताओं को नहीं मिल रहा शीघ्र न्याय

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पांच साल से लंबित है मामले

2026 में मई तक निस्तारित 67 केसों में केवल 20 में उपभोक्ताओं को राहत

90/150 दिन में निपटारा करना था, लंबित हैं 5 साल तक पुराने मामले

अविकल उत्तराखंड

काशीपुर। नये उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में उपभोक्ताओं को शीघ्र न्याय दिलाने के प्रावधान होने के बावजूद उपभोक्ताओं को समय से शीघ्र न्याय नहीं मिल रहा है। इसका उदाहरण उधमसिंह नगर जिला उपभोक्ता आयोग के केसों के निपटारे सम्बन्धी विवरण व अभिलेख हैं।
इसके अनुसार 2026 में मई तक निपटाये गये 67 केसों में केवल 20 में ही उपभोक्ताओं को राहत मिली है। अधिकतर केस निर्धारित समय सीमा 90 से 150 दिन के भीतर नहीं निपटाये गये है। 8 केस तो 5 साल से अधिक से लंबित हैं।

सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन ने उधमसिंह नगर जिला उपभोक्ता आयोग से केसरों के निपटारें, मध्यता सेल के गठन सहित विभिन्न सूचनायें चाही थी। इसके उत्तर में लोक सूचना अधिकारी/वरिष्ठ सदस्य नवीन चन्द्र चंदोला ने अपने पत्रांक 129 से सूचनायें व विवरण की सत्यापित फोटो प्रतियां उपलब्ध करायी है।

प्राप्त निस्तारित/लंबित/वादों की प्रगति आख्या मई 2026 के अनुसार मई माह के अंत में 301 केस लंबित थे । इसमें केवल 22 केस ही 90 दिनों से कम अवधि के है जबकि 124 केस दो वर्ष से अधिक, 78 केस 1 वर्ष से अधिक तथा 38 केस 6 माह से अधिक अवधि से लंबित है।
नदीम ने बताया कि उपभोक्ता सरंक्षण अधिनियम की धारा के अन्तर्गत उपभोक्ता मामले का निपटारा साधारणतः 90 दिन (प्रयोगशाला वाले मामलों में 150 दिन) में करने का प्रावधान है।

धारा 38(7) के अन्तर्गत तिथि स्थगन (तारीख) साधारणतः न देने तथा अपवादित परिस्थिति में कारण लिखकर जमा हर्जाने का आदेश करके ही देने का प्रावधान हैं लेकिन इस प्रावधान का सही ढंग से पालन न होेने से उपभोक्ता केसों का निपटारा समय से नहीं हो पा रहा हैं।
उपलब्ध तिमाही विवरण जनवरी 2026 से मार्च 2026 के अनुसार लंबित केसों में पांच वर्ष से अधिक से लंबित 8 केस शामिल हैं। एक केस 2020 तथा 7 केस 2021 में फाइल किया गया है। निस्तारण में देरी का कारण पक्षकारों द्वारा तिथि स्थगन लिखा गया है।

2001 में जिला आयोग/फोरम क्रियाशील होने से 31 मार्च 2026 तक कुल 4089 उपभोक्ता वाद दायर हुये है इसमें सर्वाधिक 1360 परिवाद इंश्योरेंस से सम्बन्धित है जबकि दूसरे स्थान पर 238 बैंकिंग तथा तीसरे स्थान पर 212 बिजली से सम्बन्धित हैं।
इसके अतिरिक्त 172 मेडिकल, 160 टेलीफोन, 152 हाउसिंग, 5 एयर लाइंस तथा 1763 अन्य से संबंधित परिवाद दायर किये गये है।
नदीम को उपलब्ध केस डिस्पोजल रजिस्टर के अध्ययन से स्पष्ट है कि उपभोक्ता केसों का निपटारा देरी से तो हो ही रहा हैं लेकिन उन्हें देरी से भी अधिकतर केसों में राहत नहीं मिल पा रही हैं।

रजिस्टर के अनुसार जनवरी से मई 2026 तक निपटाये गये 67 केसों में केवल 20 ही उपभोक्ता के पक्ष में हुये हैं। जनवरी 2026 में कुल 10 केस निपटाये गये है जिसमें केवल 3 ही परिवादी के पक्ष में हुये हैं जबकि 5 को निरस्त कर दिया गया हैं, 2 वापस लेें लिये गये हैं।
फरवरी माह में कुल निस्तारित 16 केसों में केवल 3 परिवादी के पक्ष में हुये है जबकि 4 निरस्त, 1 वापस तथा 8 नोट प्रेस केस शामिल हैं। मार्च माह में कुल निपटाये गये 11 केसों में 5 परिवादी के पक्ष में हुये है जबकि 4 निरस्त 1 नोट प्रेस सहित 6 विपक्षी के पक्ष में हुये हैं। अप्रैल माह में कुल 14 निस्तारित केसों में 4 केस ही परिवादी के पक्ष में हुये है तथा 3 वापस 1 नोट प्रेस सहित 10 केस विपक्षी के पक्ष में हुये हैं। मई 2026 में निपटाये गये 16 केसों मे से 5 ही परिवादी के पक्ष में हुये जबकि 3 वापस 2 निरस्त 3 नोट प्रेस सहित 11 विपक्षी के पक्ष में हुये हैं।
जिला आयोग द्वारा अपने राज्य आयोग को भेजी जाने वाली विवरणी में जिन केसों को निधारित समय सीमा के भीतर निस्तारित दिखाया गया हैं उनमें से अधिकतर का निपटारा न तो परिवादी के पक्ष में निर्णय हुआ है और न ही उसका गुणदोष के आधार पर ही निर्णय हुआ हैं बल्कि सामान्यता तकनीकी आधार पर उसका निपटारा किया गया है।

जनवरी 2026 में 10 में से 5 केसों को निधारित समय सीमा के भीतर निपटारा दर्शाया गया है जबकि डिस्पोजल रजिस्टर के अनुसार इसमें से 2 केस 1 माह में ही वापस लिये गये है तथा 2 केस निरस्त कर दिये गये हैं। फरवरी में 16 में से 2 समय सीमा के भीतर निपटाये दिखाये गये है जबकि डिस्पोजल रजिस्टर में 1 केस परिवादी के पक्ष में तथा 1 केस 11 दिन में वापस दर्शाया गया हैं। मार्च में 11 में से 1 केस समय सीमा के भीतर दर्शाया गया जबकि डिस्पोजल रजिस्टर के अनुसार नोट प्रेस के आधार पर 6 दिन में ही उक्त केस का निपटारा हो गया है। अप्रैल में 14 केसों में से 4 केस समय सीमा के भीतर दर्शाये गये हैं जबकि डिस्पोजल रजिस्टर के अनुसार 2 केस एक सप्ताह के भीतर वापस लेने तथा दो केस 1 दिन तथा 11 दिन में निरस्त करने के आधार पर निस्तारित किये गये है। मई में 16 में से 5 केस समय सीमा मंे निस्तारित दर्शाये गये है जबकि केस डिस्पोजल रजिस्टर के अनुसार 3 केस 11 दिन के अंदर वापस तथा 2 केस पैरवी न करने कारण खारिज कर दिये गये हैं।

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