हरिद्वार नगर निगम के भूमि घोटाले में धामी सरकार की कार्रवाई राज्य के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े फैसले के रूप में मानी जा रही है। आज तक के इतिहास में इतनी बड़ी संख्या में अफसर-कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई है। हालांकि 2002 में एक डीएम जरूर सेवा से बर्खास्त हो चुके हैं। हरिद्वार नगर निगम ने 15 करोड़ की जमीन 54 करोड़ में खरीदकर जो भ्रष्टाचार किया था, उस पर सरकार पहले ही दिन से सतर्क और गंभीर दिखी।
हरिद्वार नगर निगम की विवादित भूमि खरीद का मामला अब उत्तराखंड के सबसे बड़े प्रशासनिक विवादों में शामिल हो चुका है। करीब 54 करोड़ रुपये में खरीदी गई भूमि को लेकर उठे सवालों ने कई वरिष्ठ अधिकारियों को जांच के दायरे में ला दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जांच के निर्देश दिए। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद जून 2025 में दो आईएएस अधिकारियों समेत 12 अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। इसके साथ ही विजिलेंस को विस्तृत जांच सौंपी गई।

