सरकारी स्कूलों से घटती छात्र संख्या पर चिंता जताई गई है। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में उच्च प्राथमिक से माध्यमिक स्तर पर पहुंचते-पहुंचते 10 में से चार बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं।
प्रदेश के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था भरोसे के संकट से गुजर रही है, यही वजह है कि स्कूलों में छात्रों की संख्या तेजी से घटती जा रही है। नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि राज्य में 2959 स्कूल ऐसे हैं जो एकल शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। वहीं, 39 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें 33 शिक्षक दर्शाए गए हैं पर छात्र एक भी नहीं है।
नीति आयोग की इस रिपोर्ट में सरकारी स्कूलों से घटती छात्र संख्या पर चिंता जताई गई है। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में उच्च प्राथमिक से माध्यमिक स्तर पर पहुंचते-पहुंचते 10 में से चार बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं। इसकी एक वजह यह बताई गई है कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तरों के विपरीत माध्यमिक स्तर आरटीई के तहत नहीं आता। जो केवल 14 वर्ष की आयु तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है।
परिणामस्वरूप कक्षा आठवीं के बाद पढ़ाई जारी रखने का वित्तीय बोझ, ट्यूशन, यूनिफॉर्म, किताबें और परिवहन आदि का खर्च परिवारों पर पड़ता है। जिससे अक्सर विशेष रूप से कम आय वाले परिवारों के बच्चों को स्कूल छोड़ना पड़ता है।
परिणामस्वरूप कक्षा आठवीं के बाद पढ़ाई जारी रखने का वित्तीय बोझ, ट्यूशन, यूनिफॉर्म, किताबें और परिवहन आदि का खर्च परिवारों पर पड़ता है। जिससे अक्सर विशेष रूप से कम आय वाले परिवारों के बच्चों को स्कूल छोड़ना पड़ता है।